kisan yojana: कैसे कृषि ने निर्यात के क्षेत्र में नया रिकार्ड बनाया जानिये

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 kisan yojana: कैसे कृषि ने निर्यात के क्षेत्र में नया रिकार्ड बनाया जानियेkisan yojana : हम बात कर रहे है कृषि की, जी हां पहले की बात यह थी कि भारत को कृषि के उत्पादन का स्तर इतना कम था कि  दूसरे देशों के आयात से ही पूरी जरूरत हो पाती थी। यह बात है १९६० के भारत की जब जय जवान जय किसान का नारा दिया गया था। पर बात आज की की जाये तो अब भारत की बात कुछ और ही है। आज की बात यह है कि भारत का रिकार्ड उत्पादन और निर्यात क्षेत्र में उछाल आने का प्रमुख वजह है तकनीक के साथ कृषि करना। आज आपको बताते है कि कैसे कृषि के क्षेत्र में भारत ने निर्यात का नया रिकार्ड स्थापित किया है।

कोरोना काल में भी बढ़ा निर्यात :

pradhan mantri kisan yojana: देश की उत्पादन प्रणाली में एक प्रमुख स्थान कृषि उत्पादन का है। कृषि उत्पादन में यदि गिरावट आती है तो इसका बुरा असर देश में आम लोगों की जेब पर पड़ता है साथ ही निर्यात के क्षेत्र में बुरी चोट पहुंचती है। आज के दौर में  हमारे किसान हितैषी नीतियों के परिणाम स्वरूप आज भारत अधिकांश कृषि उत्पादों के मामले में विश्व में पहले या दूसरे क्रम पर है।

मिल रहा है आग्रेनिक उत्पादों को विश्व में प्रतिसाध

kisan news today : natural farming यानी (organic farming ) आर्गेनिक उत्पादों को विश्व में पसंद किया जा रहा है इसी का नतीजा है कि अब कोरोना महामारी जैसी विपरीत रिस्थितियों के बावजूद भारत से लगभग पौने 4 लाख करोड़ रुपए का कृषि निर्यात हो चुका है।

भारत में कृषि का क्षेत्र तकनीक से जुड़ा

केन्द्र द्वारा भारत के कृषि उत्पादन को एक जगह पर लाने के लिये राष्ट्रीय कृषि बाजार (ई-नाम) के नाम से कार्य किया है इसमें देश की मंडियों को जोड़ा जा रहा है।
बात तकनीक की हो रही है तो तकनीक के मामले में खेती में टेक्नालाजी का उपयोग हो इसके लिये ड्रोन तकनीक का उपयोग किया जा रहा है ताकी आने वाले दिनों में अधिकाधिक फसलों की बुवाई के साथ फसल सुरक्षा भी संभव होगी।
pm kisan latest news : केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि सरकार ने ड्रोन के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए पालिसी घोषित की है kisan drone ड्रोन का उपयोग जैसे-जैसे बढ़ेगा, कृषि में तो इसका फ ायदा होगा ही, किसानों सहित खेती से जुड़े लोगों के शरीर पर केमिकल दुष्प्रभाव से बचा जा सकेगा एवं रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। किसानों के हितों के लिए सरकार की काफी योजनाएं है और कम ब्याज पर बैंकों का पैसा भी किसानों के पास आसानी से पहुंच रहा है जिसकी राशि अभी लगभग 16 लाख करोड़ रु. है।

किसानों को सब्सिडी व लोन दिलवाने की योजना :

किसानों को उधार कर्ज देने के लिये भी प्रयास किये जा रहे हैं इसके लिये एफ.पी.ओ. के माध्यम से अच्छा बीज-खाद तथा आसान लोन भी मिलेगा, जिससे कुल मिलाकर किसानों की आय बढ़ेगी व उन्नत खेती होगी। सरकार ने जगह-जगह कस्टम हायरिंग सेंटर की व्यवस्था की है और किसानों को कृषि उपकरणों के लिए सब्सिडी भी दी जा रही है।

प्रायवेट सेक्टर के सहयोग

प्राईवेट निवेश करने की ओर देश की कृषि अर्थव्यवस्था जा चुकी है। पहले कृषि क्षेत्र में निजी निवेश के दरवाजे प्राय: बंद जैसे थे लेकिन अब वेयर हाउस, कोल्ड स्टोर, पैकेजिंग मशीन आदि सुविधाएं गांवों तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है, जिसके लिए कृषि व सम्बद्ध क्षेत्रों में केंद्र ने डेढ़ लाख करोड़ रु. से ज्यादा के विशेष पैकेजों का प्रावधान किया है।
किसान आर्गेनिक व प्राकृतिक खेती की तरफ जाएं व उनकी गुणवत्ता जनोपयोगी हो। प्रधानमंत्री फ सल बीमा योजना के अंतर्गत किसानों को उनकी फसल के नुकसान के मुआवजे के रूप में 1.15 लाख करोड़ रु. की क्लेम राशि अभी तक दी जा चुकी है।

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कुल मिलाकर भारत की कृषि अर्थव्यवस्था के परिधी को नया आकार दे रही है। निर्यात क्षेत्र में बदलाव होने की बात तो ठीक है परंतु आगामी समय में जो आपने कृषि तकनीक के बारे में जाना है उससे एक बात स्पष्ट है कि  कृषि उत्पादन ज्यादा आग्रेनिक रूप से किया जाये यह तो ठीक है परंतु साथ-साथ तकनीक का उपयोग भी करना बेहतर है जैसे मौसम का पूर्वानुमान, मिट्टी की किस्म, फसलों की प्रजातियों व खाद के बारे में सहायता मिलना भी किसानों को जरूरी है तभी निर्यात के क्षेत्र में नये रिकार्ड बनेंगे।

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