Hareli tihar : प्रकृति से जोड़ता प्राचीन परंपरा का पर्व

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Hareli festival : प्रकृति से किसानों को जोड़ता प्राचीन परंपरा का पर्व

Hareli tihar : (Hareli festival)  हरेली पर्व यानी हरेली त्योहार मनाये जाने के पीछे की मुख्य वजह हरियाली है। छत्तीसगढ़ का यह त्योहार पौराणिक, धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताओं के साथ- साथ प्रकृति, ऋतुओं से जुड़ा एक ऐसा ही एक पर्व है हरेली तिहार (Hareli Tihar) जो खास तौर पर छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) में ही धूम-धाम के साथ मनाया जाता है. यहां हरेली को पहला त्योहार कहा जाता है. हर साल हरेली (hareli tyohar :)सावन मास की अमावस्या को मनाया जाता है. 

hareli tyohar : हरेली तिहार का महत्व 

हरेली तिहार छत्तीसगढ़ का पहला त्यौहार है छत्तीसगढ़ में सर्व प्रथम hareli tyohar को मनाया जाता है। हरियाली के प्रतीक के तौर पर खेत खलिहान में प्राय: यह त्त्यौहार किसानों को फसलों के लिये प्रेरित करने और फसलों तथा प्राकृतिक रूप से संरक्षण के उददेश्य को पूरा करने के लिये हर साल यह मनाया जाता है। हरेली तिहार मनाये जाने के पीछे किसानों की मेहनत छिपी है। इस दिन हरेली तिहार (hareli tihar) के दिन हरेली अमावस भी 

Hareli Kab Hai : इस वर्ष 2022 में हरेली त्यौहार (hareli tihar) श्रावण अमावस्या 28 जुलाई दिन गुरुवार को मनाया जाएगा। अर्थात 2022 में हरेली तिहार छत्तीसगढ़ में जुलाई महीने की 28 तारीख को है।

क्या होता है हरेली तिहार (Hareli tihaar ) के दिन: 

इस दिन छत्तीसगढ़ में एक अलग नजारा देखने को मिलता है। छत्तीसगढ़ में कड़ी मेहनत से थके हुए किसान इस दिन अपने औजारों की पूजा करते हैं. कृषि प्रधान राज्य होने की वजह से ही यहॉ पर हर साल सावन माह में जुताई और बुआई का काम पूरा होता है । प्राकृतिक तरीके से रोग दूर करने का उपाय भी हमारे देश में देखेने को मिलता है और इसी के राह पर छत्तीसगढ़ भी शामिल है। 

नीम (Neem) की पत्ती का उपयोग : 

Hareli in Chhattisgarh in 2022  - छत्तीसगढ़ में नीम का उपयोग Hareli tihar  के दिन किया जाता है। आपको बता दें कि नीम का उपयोग आयुर्वेद में भी किया जाता है। नीम में ऐसे गुणकारी तत्व मौजूद होते हैं जिनसे कर्ई प्रकार के बीमारियों का इलाज हो जाता है। खासकर  किटाणुओं का नाश भी नीम की पत्ती से किया जाता है। मच्छरों के निपटारे की बात हो या चाहे चर्म रोग इन सभी समस्याओं में नीम एक औषधी के रूप में कार्य करता है। इसी कारण से यह देखने में आया है कि प्रदेश की जो हरेली तिहार का पर्व है इस पर्व में भी नीम का उपयोग किया जाता है। वातावरण में रोग फैलाने वाले बैक्टीरीया और वायरस भी बढ़ जाते बरसात के मौसम में ऐसे में घरों के दरवाजे पर नीम की पत्तीयां लगाई जाती हैं, जो हवा को शुद्ध करती है. और लोगो को स्वस्थ रहने में मददगार होती है।

किसान hareli tihar के दिन उपवास व्रत रखते हैं और फसल एवं औजार की पूजा करते हैं । छत्तीसगढ़ एक कृषि प्रधान राज्य है इसे धान का कटोरा कहा जाता है यहां के लोग कृषि आधारित जीवकोपार्जन एवं व्यवसाय करते हैं। किसानों के लिए खास महत्व है, हरेली तिहार हरियाली का प्रतीक है जो कि किसानों एवं खेत खलिहानों एवं फसल से सीधा ताल्लुक रखता है। इसलिए छत्तीसगढ़ में हरेली तिहार का महत्व है।

 Hareli Tihar छत्तीसगढ़ का पहला त्योहार है हरेली त्यौहार को पारम्परिक एवं लोक पर्व माना जाता है। छत्तीसगढ़ में हरेली त्योहार को बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। हरेली त्यौहार के दिन किसान अपनी खेती बाड़ी में काम आने वाली सभी औजार हल, फावड़ा, कुदाली और आधुनिक कृषि यंत्र जैसे ट्रेक्टर आदि को को नहलाकर पूजा की जाती है।

कैसे मनाया जाता है हरेली पर्व :  

हरेली तिहार के दिन छत्तीसगढ़ के किसानों के लिये खास दिन होता है। इस दिन किसान अपनी फसल की बीमारी कीट पतंगों से रक्षा हेतु पारंपरिक तरीके से पूजा करते हैं।  किसान इस दिन पूजा में धूप दीप जावल के साथ साथ दशमूल पौधे की टहनी एवं बेलवा की टहनी लाकर अपने खड़ी फसल की पूजा करते हैं। मान्यता है कि दशमूल की कांटेदार टहनी एवं बेलवा की टहनी फसल की बीमारी कीट पतंगों से सुरक्षा प्रदान करती है। 

हरेली तिहार के दिन बांस की लकड़ी से बनाई गई गेड़ी का उपयोग किया जाता है। Hareli Tihar के दिन लोग सभी अपने घर में छत्तीसगढ़ का प्रसिद्ध मिष्ठान चिला रोटी तवे में भून कर चिला रोटी का प्रसाद भी पूजा में अर्पण करते हैं तथा चिला रोटी का प्रसाद बांटते हैं। हरेली तिहार के दिन बांस की लकड़ी से बनाई गई गेड़ी का उपयोग किया जाता है, छत्तीसगढ़ राज्य सांस्कृतिक लोक पर्व का धरोहर कहा जाता है hareli tihar भी सांस्कृतिक लोक पर्व है।  

इस दिन से बच्चे गेड़ी बनाकर चढ़ते हैं तथा पोला त्योहार को गेड़ी तोड़ते हैं।आपको बता दें कि गेड़ी से जोड़ने के लिये  छत्तीसगढ़ के स्कूलों में गेड़ी नृत्य प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी।  हरेली त्योहार के दिन गांव के झाकर बैगा लोग घर घर जाकर दशमूल पौधे एवं बेलवा की पत्ती बांधते हैं ताकि गांव में भी किसी प्रकार की बीमारी न आए।

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