maharashtra political history : CM शिंदे और उद्धव के बीच हिन्दुत्व पर बढ़ी दूरी

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maharashtra political history :  महाराष्ट्र्र में नई सरकार बनी पर भाजपा का सीएम नहीं बना ऐसा क्यों हुआ इसके पीछे भी कई तर्क हैं। महाराष्ट्र की राजनीति को समझने के लिये पहले महाराष्ट्र की सत्ता के प्रमुख चेहरों को जान लेना चाहिये। 

maharashtra political history : सीएम शिंदे और उद्धव के बीच हिन्दुत्व पर बढ़ी दूरी

सीएम एकनाथ शिंदे और उद्धव ठाकरे (eknath shinde vs uddhav Thackeray ) के बीच हिन्दुत्व के विषय पर ही मतभेद हुए हैँ ऐसा माना जा रहा है।  ऐसा इसलिये कहा जा रहा है क्योंकि उद्धव ठाकरे ने अपनी आखिरी मंत्रीमंडल बैठक में हिन्दूत्व की राह पर लौटते हुए महाराज संभाजी के नाम से औरंगाबाद का नाम रखने का फैसला लिया था महाराष्ट्र की राजनीति में शरद पवार की पार्टी एनसीपी और बाला साहेब ठाकरे की पार्टी शिवसेना के बीच की असली लड़ाई है। एनसीपी बनाम शिवसेना की लड़ाई का लाभ भाजपा को मिलेगा यह ऐसे समझें:

maharashtra crisis in 2022: एनसीपी बनाम शिवसेना : जब-जब शिवसेना की जीत हुई है तो अधिकतर सीटों में एनसीपी के उम्मीदवार की हार से ही जीत नसीब हुई है। कहने का मतलब शिवसेना की जीत में प्रतिद्वंदी एनसीपी का ही रहता है।

भाजपा बनाम एनसीपी:

Bjp vs NCP - भाजपा और एनसीपी में बहुत बड़ा अंतर यह है कि एनसीपी लोकल पार्टी के तौर पर महाराष्ट्र में मजबूत बनना चाहती है पर इसके उलट भाजपा राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दोनों ओर हिन्दुत्व के एजेंडे के साथ चलना चाहती है।

भाजपा का संदेश: हिन्दुत्व का एजेंडा

shiv sena history : भाजपा ने हिन्दुत्व के लिये सत्ता का लालच भी छोड़ दिया । शिवसेना के बागी विधायकों के संग जो सरकार बनाई है वह भी हिन्दुत्ववादी सोच के कारण किया है। सीएम फडणवीस ने भी यह बात कही थी कि उद्धव ने हिन्दुत्व को नुकसान पहुचाया ।

उद्धव को करना होगा ये काम :

maharashtra politics news : पूर्व सीएम उद्धव ठाकरे को शिवसैनिकों से वापस बात कर अपनी परिवारवादी छवि को नष्ट करते हुए सीएम शिंदे को अपना लेना चाहिये जो शिवसेना के लिये ही अच्छा साबित होगा। उद्धव ठाकरे के लिये एक नुकसान वाली बात यह भी है कि लोग शिवसेना के संस्थापक बाला साहेब ठाकरे को ही अपना मार्गदर्शक मानते हैं यही कारण है कि उद्धव ठाकरे के खिलाफ भाजपा के संग मिलकर एकनाथ शिंदे ने सरकार बना ली। भाजपा भी  हिन्दुत्व के मुददे पर बाला साहेब ठाकरे को सम्मान देती है और शिवसेना और भाजपा में यही समानता से ही महाराष्ट्र में मेल संभव हुआ।

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