cg news : छत्तीसगढ़ में मानसून की एंट्री से होगा ये हाल

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मानसून के दस्तक के साथ ही बढ़ी प्रदेश वासियों की मुसीबतें

cg news : प्रदेश में (cg hindi news) मानसून की दस्तक से सूखे और गर्मी से राहत मिली है। आने वाले दिनों में वर्षा की स्थिति क्या रहेगी इससे मौसम विभाग अपडेट लगातार दे रहा है। वहीं एक बात यह भी महत्वपूर्ण है कि इस बार मानूसन (chhattisgarh monsoon) का जल्दी आना और जल्दी जाना तय रहेगा। क्योंकि अब जो हालात बन रहे हैं उससे जुलाई के माह में ही प्रदेश को पर्याप्त वर्षा का पानी मिलने की संभावना जताई जा रही है। 

छत्तीसगढ़ में मानसून : वर्षा ऋतु एंट्री हो गई है बारिश असर अब सीधे सीधे छत्तीसगढ़ के किसानों की बुआई पर पड़ रहा है और अब कम बारिश होना प्रकृति पर निर्भर करता है लेकिन छत्तीसगढ़ में मानसून की बारिश पूरी तरह से बंगाल की खाड़ी में बने सिस्टम पर निर्भर है फिलहाल खाड़ी में कोई सिस्टम बनेगा या नहीं  यह  तो समय ही बतायेगा। 

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‍news cg : बात करें मानसून से जल भराव की तो प्रदेश को हर साल लगभग 1500 सेन्टीमीटर बारिश की आवश्यकता होती है। औसत वर्षा भी कम से 1500 सेन्टीमीटर होना आवश्यक है इससे जल की समस्या किसानो को नहीं होती है। पर यह तो समय ही बतायेगा कि प्रदेश में कितनी बारिश होगा कम या ज्यादा।

 बारिश से होगी फसलें हरी भरी

प्रदेश की वर्षा का औसत पैमाना जो है उसके अनुसार यदि पानी गिरेगा तो प्रदेश में किसानों की फसलों को भी फायदा मिलेगा। प्राय: देखा जाता है कि प्रदेश में जुलाई से सितंबर तक ही बारिश होती है जिससे किसान की फसलों को भी लाभ  मिलेगा। अब देश की औसत वर्षा के साथ ही प्रदेश की औसत वर्षा का पैमाना  निर्भर रहेगा। आने वाले समय में बाढ़ की स्थिति भी ना बने यह तो हानिकारक ही होता है किसानों के लिये और इससे महंगाई भी बढ़ जाती है।

शहर में बरसात के पानी से निपटने की व्यवस्था : 

शहर में बारिश के पानी निपटने के लिये आसानी के साथ क्या उपाया किये जा रहे हैं इसका ध्यान रखना आवश्यक है। एक ओर प्रदेश की सरकार वर्षा के जल का प्रबंधन करने की कोशिश में है तो वही दूसरी ओर निगम भी मुस्तैद है। छत्तीसगढ़ में रेन वाटर हावेस्टिंग सिस्टम को लागू किया गया है। पीएम मोदी ने हाल ही में अपील की थी कि वर्षा के जल को सहेजना जरूरी है। वर्षा का जल कैसे सहेजेंगे यह तो छोटे से छोटे बूथ लेवल पर तय करने की आवश्यकता है। 

बारिश से होने वाले प्रभाव : 

बारिश का असर सीधे आम जनता पर पड़ता है। ज्यादा बारिश भी घातक है और कम बारिश भी समस्या बन जाती है। इसी को देखते हुए माना जाये तो प्रदेश में होने वाली फसलों में मुख्यत: धान की फसल है जिसे पानी की आवश्यक्ता होती है। नवंबर में काटी जाने वाली फसलों में यही फसल है धान का रखरखाव करते समय भी पानी आ जाने से अनाज की समस्या उत्पन्न हो जाती है।

कोयला संकट का कनेक्शन बारिश से 

अभी हाल में जो कोयला संकट की चर्चा की जा रही थी देश में उसका संबंध भी वर्षा से हो गया है। जीं हां हाल में जो बातें की जा रही थी कोयले की कमी को लेकर वह छत्तीसगढ़ की कोयला खदान में पानी भरने के कारण भी नुकसान हुआ  था ऐसा खबरों में है इसी कारण से कोयले की कमी होने की बातें कही जाने लगी । 

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