World No Tobacco Day 2022 : कैसे तंबाकू का सेवन है खतरा

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world no tobacco day  : कैसे तंबाकू का सेवन है खतरा

हम आपको बता रहे हैं कि कैसे तंबाकू का सेवन स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाता है। तंबाकू या तंबाकू से संबंधित उत्पादों का सेवन करने वालों को कई गंभीर बीमारियां हो सकती हैं।  बावजूद इसके बड़ी संख्या में लोग किसी न किसी रूप में तंबाकू (बीड़ी, सिगरेट, गुटखा आदि) का सेवन करते हैं।
world no tobacco day 2022- इसलिए इस वर्ष "तंबाकू हमारे पर्यावरण के लिए खतरा" थीम पर 31 मई को विश्व तंबाकू निषेध दिवस मनाया जाएगा।आपकी जानकारी के लिये तंबाकू के नुकसान के प्रति जागरूक करने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने को प्रेरित करने के लिए प्रत्येक वर्ष 31 मई को "विश्व तंबाकू निषेध दिवस" मनाया जाता है।  

no tobacco day in india- मुख्य तंबाकू के नुकसान इस प्रकार हैं:

  १. "तंबाकू युक्त पदार्थों का सेवन करने से ना सिर्फ हमारे स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचता है बल्कि कई गंभीर बीमारियों के होने का खतरा भी रहता है।
२. इसके अतिरिक्त तंबाकू अपने पूरे जीवनचक्र में पृथ्वी को प्रदूषित भी करती है।
३. तंबाकू के सेवन से कई बीमारियों का खतरा - फेफड़े का कैंसर, लिवर कैंसर, मुंह का कैंसर, कोलन कैंसर, गर्भाशय का कैंसर, इरेक्टाइल डिस्फंक्शन और हृदय रोग जैसी बीमारियां शामिल हैं।

छत्तीसगढ़  की स्थिति चिंतनीय -

no tobacco day chhattisgarh - छत्तीसगढ़ में  छत्तीसगढ़ में 39.1 प्रतिशत लोग तंबाकू या तंबाकू युक्त पदार्थों का सेवन करते हैं। इनमें गुड़ाखू (तंबाकू युक्त नशीला पदार्थ) का सेवन करने वाली महिलाएं भी शामिल हैं। साथ ही साथ 13 से 15 वर्ष के स्कूल जाने वाले 8 प्रतिशत बच्चे भी तंबाकू या तंबाकू युक्त पदार्थों का सेवन करते हैं। वैश्विक युवा तंबाकू सर्वेक्षण 2019 के अनुसार प्रदेश के लिए यह चिंतनीय है इसलिए तंबाकू नियंत्रण की दिशा में और अधिक प्रयास करने की जरूरत है।

नशा सेवन छोडऩे के फायदे-

धूम्रपान ना करने के कई फायदे है। धूम्रपान बंद करने पर उच्च हृदय गति और रक्त चाप में कमी आती है, खून में मौजूद कार्बन मोनोऑक्साइड का स्तर घटकर सामान्य हो जाता है, शरीर के भीतर खून का प्रवाह और फेफड़ों की कार्य क्षमता बढ़ती है, दिल से जुड़ी बीमारियां होने का खतरा धूम्रपान करने वालों की तुलना में आधा हो जाता है, मस्तिष्काघात का खतरा कम होगा, मुंह, गले, मूत्राशय, अग्नाशय, गर्भाशय और फेफड़ों का कैंसर होने का खतरा कम हो जाएगा।

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