mahavir jayanti :भगवान महावीर ने किया था बड़े भाई के साथ ऐसा काम तो कहलाये आज्ञाकारी....

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 महावीर जयंती जैन समाज द्वारा  भगवान महावीर के जन्म उत्सव के रूप मे मनाई जाती है. यह जैन धर्म के पर्व के रूप में मनाया जाता है।  महावीर जयंती के का एक और नाम महावीर जन्म कल्याणक भी है. हम आपको बता रहे हैं महावीर जयंती क्यों मनाई जाती है?   दरअसल जैन धर्म के प्रवर्तक भगवान महावीर का जीवन  महावीर जयंती हर वर्ष चैत्र माह के 13 वे दिन मनाई जाती है,  जो कि मार्च या अप्रैल मे आती है. इस दिन सरकारी अवकाश घोषित है यानि शासकीय क्षेत्र में काम नहीं होता है। महावीर स्वामी का जन्म ऐसे युग में हुआ, जहां पशुबलि, हिंसा और जाति-पाति के भेदभाव का अंधविश्वास था. 

इन नामों से भी जाने जाते थे भगवान महावीर ( Mahavir jayanti history in hindi)

भगवान महावीर के कई नाम थे उनमें प्रमुख नामों की चर्चा करेंगे : कई नामो से जाने गए उनके कुछ प्रमुख नाम वर्धमान, महावीर, सन्मति, श्रमण आदि थे.  भगवान महावीर ने जब शिक्षा पूरी की तो इनके माता—पिता ने इनका विवाह राजकुमारी यशोदा के साथ कर दिया. भगवान महावीर को एक पुत्री की प्राप्ति हुई, जिसका नाम प्रियदर्शना था उनका विवाह जमली से हुआ.

600 वर्ष पूर्व चैत्र शुक्ल त्रयोदशी के दिन भगवान महावीर का जन्म लगभग क्षत्रियकुण्ड नगर मे हुआ. भगवान महावीर  के पिता का नाम महाराज सिद्धार्थ थे उनकी माता का नाम महारानी त्रिशला था। 

स्वामी महावीर के पिता राजा सिद्धार्थ के अनुसार : जब से महावीर स्वामी का जन्म उनके परिवार मे हुआ है, तब से उनके धन धान्य कोष भंडार बल आदि सभी राजकीय साधनो मे बहुत वृध्दी हुई, इस कारण से उन्होंने सभी की सहमति से तो उन्होने सबकी सहमति से अपने पुत्र का नाम वर्ध्दमान रखा.

जैन धर्म के चौबीसवें तीर्थंकर बनें महावीर स्वामी 30 वर्ष की आयु में वैराग्य… 

महावीर स्वामी जी ने 30 वर्ष की आयु मे वैराग्य लिया. परंतु आपको बता दें कि उन्होंने अपने ज्येष्ठ भाई की बात को मान वैराग्य के लिये 2 वर्ष का इंतजार किया। आपको बता दें कि महावीर स्वामी के माता पिता की मृत्यु के पश्चात उनके मन मे वैराग्य लेने की इच्छा जागृत हुई थी। 

भगवान महावीर स्वामी घर का त्याग कर  जंगल में रहने लगे. वहां उन्हें 12 वर्ष के कठोर तप के बाद जम्बक में ऋजुपालिका नदी के तट पर एक साल्व वृक्ष के नीचे सच्चा ज्ञान प्राप्त हुआ.  30 वर्ष तक महावीर स्वामी ने त्याग, प्रेम और अहिंसा का संदेश फैलाया और बाद में वे और विश्व के श्रेष्ठ महात्माओं में शुमार हुए.

महावीर स्वामी जी ने उस समय जाती-पाति और लिंग भेद को मिटाने के लिए उपदेश दिये. भगवान महावीर ने अहिंसा, तप, संयम, पाच महाव्रत, पाच समिति, तीन गुप्ती, अनेकान्त, अपरिग्रह एवं आत्मवाद का संदेश दिया. महावीर स्वामी जी ने यज्ञ के नाम पर होने वाली पशु-पक्षी तथा नर की बाली का पूर्ण रूप से विरोध किया तथा सभी जाती और धर्म के लोगो को धर्म पालन का अधिकार बतलाया. 

कार्तिक मास की अमावस्या को रात्री के समय महावीर स्वामी निर्वाण को प्राप्त हुये, निर्वाण के समय भगवान महावीर स्वामी जी की आयु 72 वर्ष की थी.

आपको इस पोस्ट से महावीर का जन्म कब हुआ? इस सवाल की जानकारी मिली और साथ ही भगवान महावीर किन नामों से भी जाने जाते थे ? यह भी इस पोस्ट से पता चला। ऐसे ही पोस्ट पढ़ने रहने के लिये जुड़े रहिये हमारे वेबर्साइट से ।


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