शबरी की नगरी शिवरीनारायण : श्री राम ने खाये थे झूठे बेर, जानिये कितना पुराना है मंदिर

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छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थल भारत ही नहीं बल्कि विदेश तक चर्चित है । आईए आपको बताते हैं ‍

माता शबरी की नगरी शिवरीनारायण श्री राम ने खाये थे झूठे बेर की लोकप्रियता:

शिवरीनारायण का महत्व सिर्फ छत्तीसगढ़ में ही नहीं बल्कि देश और विदेश में भी है।  राम वन गमन पर्यटन परिपथ परियोजना  छत्तीसगढ़ के साथ भगवान राम से जुड़ी स्मृतियों को  संस्कृति को विश्वस्तर पर नयी पहचान बनी। शिवरीनारायण को भारत का पांचवां धाम और गुप्त तीर्थ कहा जाता है। महानदी, शिवनाथ और जोंक नदी के संगम तट पर बसे शिवरीनारायण नगर में 11 शताब्दी में हैह्य वंश के राजाओं के मंदिर बनाया गया था। यहां पर छठवीं शताब्दी से लेकर 11वीं शताब्दी तक की प्रतिमाएं स्थापित हैं। शिवरीनारायण प्राकृतिक छटा से परिपूर्ण नगर है, जो छत्तीसगढ़ के जगन्नाथपुरी धाम के नाम से विख्यात है।

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छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थल के रूप में दुनिया के सामने मिलेगी नई पहचान :  

शिवरीनारायण का महत्व रामायणकालीन होने की वजह से यह नगर श्रद्धालुओं के लिए भी ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व रखता है। मतंग ऋषि का गुरूकुल आश्रम और माता शबरी की साधना स्थली भी रही है।  लगभग 11वीं शताब्दी में बना शिवरीनारायण मंदिर भगवान राम और लक्ष्मण की आस्था का बड़ा केंद्र है। इसका दूसरा नाम बड़ा मंदिर भी है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार प्रभु राम ने शबरी माता के जूठे बेर यहीं खाये थे और उन्हें मोक्ष प्रदान किया था।


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