नाटो के खिलाफ रूस का रूख, भारत की नीतियां विश्व पर डालेंगी असर

0

रूस और यूक्रेन वार में भारत की उपयोगिता विश्व की विकसित देशों की सोच से परे है। भारत विकसित देशों से भी आगे निकलकर अपनी रणनीति का उदाहरण पेश कर रहा है।  इधर नाटों के खिलाफ जो रूस का रूख रहा है उससे स्पष्ट है कि रूस नाटों को अमेरिका की कटपुतली समझ रहा है।


 भारत रूस का साथ देने के साथ ही भारत शांति का पक्षधर भी है। एक ओर रूस की सेना द्वारा यूक्रेन में जो अटैक हो रहा है उसकी वजह से जो पलायन का दौर है उसमें भारत भी अपनी एयरइंडिया और एयरफोर्स द्वारा भारत वापसी का अभियान चलाकर भारत ही नहीं बल्कि बंगलादेश, पाकिस्तान, चीन, तुर्की जैसे देशों की जनता को भी वापस लाने का काम कर रहा है। भारत की कुटनीति और भारत अपनी वसुधैव कुटुम्बकम की अवधारणा को चरितार्थ करने में कामयाब हो रहा है।

क्या अमेरिका भी विदेश नीति में बदलाव कर भारत और चीन को समकक्ष देखेगा?

क्या भारत रूस की दोस्ती को अमेरिका अपनी नीति के विरूद्ध देख रहा है। क्या अमेरिका भी विदेश नीति में बदलाव कर भारत और चीन को समकक्ष देखेगा? प्रश्च के उत्तर आने वाले समय में मिलेंगे।

विश्व भारत को आशा भरी नजरों से देख रहा है। जब अमेरिका से चीन की तनातनी हुई उस समय ट्रंप का शासन अमेरिका में था और ट्रेड वार हुआ था, तब भी भारत ने अपनी रणनीति के तहत चीन का बहिष्कार करने के साथ-साथ अमेरिका को अपनी व्यापारिक शक्ति का अहसास करवाया और अमेरिका व भारत के बीच ट्रेड में  कई समझौते हुए थे जो इससे पहले कभी भी नहीं थे। भारत की कुटनीति की कामयाबी आज देखने को मिल रही है।

एक दौर था जब अमेरिका से दूर हो चुका था, अमेरिका पाकिस्तान का पक्षधर था उसे हथियार मुहैया करवाता था। परंतु अब भारत ने हथियारों की खेप अमेरिका से मंगवानी शुरू कर दी है, जैसे फाइटर प्लेन अमेरिका ही भारत को दे रहा है। रूस के साथ भारत के जैसे संबंध रहे हैं उसे देखकर अमेरिका भी अपना इरादा जता चुका है। भारत रूस की दोस्ती से एक बात तो सिद्ध हो चुकी है कि भारत एक ओर एशिया महाद्वीप में बड़ी शक्ति बनकर उभरा है तो उसका कारण वसुधैव कुटुम्बकम ही है।

अमेरिका को भारत की शक्ति का अंदाजा है क्योंकि हाल में जब भारत ने अमेरिका से हथियारों का समझौता किया था तब अमेरिका की चेतावनी के बावजूद भारत ने रूस से एस 400 हथियार खरिदे थे, जिसे चीन भी पाना चाह रहा था पर चीन को अलग कर रूस ने पुराने दोस्त का साथ देना ही उचित समझा।

भारत की कुटनीति

कुल मिलाकर भारत की कुटनीति से हालात चाहे कितने भी बदल जायें पर भारत की नीतियां रूस का साथ देने वाली ही रही हैं। भारत रूस की दोस्ती को सारी दुनिया जिस चश्में से देख रही है उससे यह अंदाजा लगाना भी आसान है कि दुनिया के सबसे बड़े हथियार के उत्पादक अमेरिका ने अब भारत को महत्व देते हुए क्वाड देशों के सम्मेलन में यूक्रेन रूस युद्ध पर कोई चर्चा नहीं की।

भारत ने रूस के खिलाफ यूएनएसएसी में हो रही वोटिंग में अनुपस्थित होकर एक प्रकार से रूस का साथ दिया था। इसी प्रकार से पाकिस्तान ने जब रूस के खिलाफ वोटिंग की थी तब उन्होंने आरोप लगाकर पल्ला झाड़‍ दिया कि यूरोपियन संघ के दबाव की वजह से ऐसा किया। भारत रूस की दोस्ती की चर्चा का विषय पाकिस्तान में बना। वहॉ की मीडिया ने चर्चा कर भारत को एक ताकतवर और बिना किसी दबाव के फैसले लेने वाला देश बता दिया।

भारत रूस की दोस्ती

रूस को भारत ने समय-समय पर बात कर भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को आगाह किया और रूस ने भी इस बात का ध्यान रखा और 5 घंटे का युद्ध विराम किया था । भारत ने यूक्रेन को भी मानवीय सहायता दी है। भारत की कुटनीति की प्रशंसा जितनी भी की जाये वह कम है। हमारे देश हीं वरन पाकिस्तान के पीएम इमरान खान ने भी यह स्वीकार किया है। उन्होंने अपनी संसद में भारत की प्रशंसा कर यह बात कही थी कि अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद भारत की विदेश नीतियां वहॉ की जनता के लिये बनाई गई है और रूस से व्यापार को भारत जारी रख रहा है।

भारत रूस की दोस्ती से एक बात साबित हो चुकी है कि यह दोनों देश आने वाले दिनों में व्यापार के क्षेत्र में और समीप होंगे, यह चीन के लिये भी नुकसान देह साबित होगा। खैर आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि भारत की कुटनीति का लोहा तो पाकिस्तान भी मान चुका है अब क्या चीन भी भारत के साथ व्यापारिक संबंधों को कैसे जीवित रखने की पहल करता है यह चीनी विदेशमंत्री के भारत दौरे पर आने से ही सिद्ध होगा।

Tags

एक टिप्पणी भेजें

0टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें (0)

#buttons=(Accept !) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Learn More
Accept !