भारत और यूएस ने ताईवान को चीन के चंगुल से निकालने के लिये मोर्चा खोल दिया है

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ताईवान पर चीन और अमेरिका के बीच तनातनी देखने को मिल रही है। दरअसल अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाईडेन के साथ हुई मीटिंग में चीन के राष्ट्रपति जिनपिंग ने तेवर दिखा दिये। उन्होंने ताईवान पर चेतावनी दे दी। इस पर जो बाईडेन भी कहा पीछे रहते उन्होंने भी जवाब में चीन को करारा उत्तर दिया।

बात है ताईवान की ताईवान को लेकर चीन अपना बताने का दावा कर रहा है यह दावा ताईवान के लोगों को नामंजूर है, और वहॉ पर इसको लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं  ‍िफर भी  चीनताईवान को अपना बताने में तुला हुआ है।  चीन की इस बात का विरोध सबसे पहले भारत ने किया, भारत ने ताईवान का साथ देते हुए वहॉ के प्रेसीडेंट से बात भी की थी। चीन की विस्तारवादी नीति को भारत अच्छी तरह से समझता है और यही कारण है कि चीन के चंगुल से बचाने के लिये भारत ने ताईवान का साथ दिया है। ( भारत ताईवान संबंध )

इसी क्रम में अमेरिका चीन के खिलाफ भारत के साथ अपने संबंधों को और मजबूत कर रहा है ताकि आने वाले समय में चीन को टारगेट करने के लिये भारत से मदद मिले।  इसीलिये भारत के साथ व्यापार के क्षेत्र में डील होने के साथ-साथ अमेरिका में स्थित चीन की कई कंपनियों को बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है। चीन की बड़ी कंपनियों ने तो अमेरिका में नये व्यापार नियमों के चलते वहॉ से पलायन करना ही उचित समझा।  अब स्थिति यह है कि भारत के एनआरआई  अमेरिका के कंपनियों में नौकरी कर रहे हैं।

चीन के साथ अमेरिका के करीबी देशों का हुआ ब्रेकअप

चीन की विस्तारवादी नीतियों को पहले यूएन में भारत ने इशारों-इशारों में उजागर किया और अब अमेरिका इस नीति को ओपन करता जा रहा है। अब अमेरिका के सहयोगी देशों ने धीरे-धीरे करके चीन के खिलाफ आना शुरू कर दिया है। खासकर जी-7 देशों ने तो चीन से किनारा करने की योजना भी बना ली है। इसकी एक झलक कोरोना के दौरान देखने को मिली जब चीन को घेरने अमेरिका ने कोरोना वायरस पर हर्जाना चीन से वसूलने की नसीहत दे डाली थी।  अब जी-७ के कुछ देश खासकर ब्रिटेन और जर्मनी, फ्रांस और जापान, चीन से दूर रहने की कोशिश में उससे व्यापार संबंधों को कम कर रहे हैं साथ ही चीन स्थित कंपनिया भी वापस लौट रही हैं।

ताईवान पर क्यों भीड़ी महाशक्तियां

ताईवान के मुददे पर चीन और अमेरिका आपसी कलह से गुजर रहे हैं इसकी वजह है वहॉ मौजूद सिलीकॉन। ताईवान में हार्डवेयर के अंदर उपयोग किये जाने वाला सिलीकॉन प्रचूर मात्रा में उपलब्ध है। पूर विश्व के इलेक्ट्रानिक हार्डवेयर में उपयोग होने वाला सिलीकॉन का 90 प्रतिशत से भी ज्यादा भाग का सिलीकॉन ताईवान में मिलता है। इससे कल्पना कर सकते हैं कि अगर चीन का कब्जा ताईवान में हो गया तो चीन पूरे विश्व को इलेक्ट्रानिक मार्केट में मॉनिटर करेगा और विश्व में चीन के लिये निर्भरता बढ़ेगी। चीन की विस्तारवादी नीतियों को बढ़ावा ना मिले इसके लिये जरूरी है अमेरिका का साथ सभी देश देवें।

ताईवान पर क्या है चीन का दावा

ताईवान को भौगोलिक और क्षेत्रिय तौर पर चीन अपना बताने लगा है और इस बात का पुरजोर विरोध ताईवान की राष्ट्रपति और जनता करने लगे हैं। वहॉ पर चीन के खिलाफ प्रोटेस्ट हो रहे हैं। चीन की संसद में ताईवान को अपना बताने के लिये संसद में प्रस्ताव पारित हो चुका है। इसके खिलाफ जनता ने अम्ब्रेला प्रोटेस्ट शुरूकिया था जो कोरोना काल के दौरान खत्म हुआ। 

चीन ऐसे ही दावे भारत के राज्य अरूणाचलप्रदेश के लिये भी करता है, अभी हाल ही हमारे उपराष्ट्रपति वैंकेया नायडू के अरूणाचलप्रदेश दौरे पर भी चीन को मिर्ची लगी थी और उसने ग्लोबल टाईम्स में लेख लिखकर अपनी बात रखी थी।  ऐसे ही समय-समय पर चीन विस्तारवाद को बढ़ावा देने की साजिश को पुनरजीवित करता रहात है।

ताईवान अमेरिका के लिये क्यों है महत्वपूर्ण ?

अगर ताईवान चीन के चंगुल में फंस जायेगा तो यह सबसे ज्यादा नुकसानदेह अमेरिका के लिये होगा, क्योंकि अमेरिका को ग्लोबल मार्केट में राज करना है तो  सिलीकॉन की खपत और उत्पादन पर निर्भर रहने के लिये अपने ग्लोबल प्रतिस्पर्धि चीन से मदद लेनी होगी और चीन ऐसा करेगा नहीं। यही कारण है कि अमेरिका अपने जंगी हथियार ताईवान को दे दिये है चीन के खिलाफ रक्षा करने के लिये।

चीन को अलग-थलग करने की मुहीम

चीन के खिलाफ जो मुहीम चल रही है उसमें भारत अग्रणी रहा है, उसने चाहे डोकलाम हो या गलवान घाटी विवाद दोनों ही स्थिति में चीन के खिलाफ अमेरिका जैसे देशों का साथ पाया और इससे अब आने वाले दिनों में चीन अकेला हो जायेगा पाकिस्तान जैसे चीन पर निर्भर कर्जदार देश ही चीन की गुलामी करेंगे। यही कारण है कि अब भारत का साथ देकर अमेरिका चाहता है ‍कि कैसे भी चीन को व्यापारिक चोट दी जाये।

बाईडेन ने ताईवान को  चीन के चंगुल से निकालने के लिये मोर्चा खोल दिया है, आने वाले दिनों में देखना यह है कि चीन किस प्रकार से ताईवान पर अपने दोस्त देशों का समर्थन पायेगा इसके अलावा आने वाले दिनों में बाइडन कैसे ताईवान को चीन के चंगुल से बचायेंगे।

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